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उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है!
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है!
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर!
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!


कुछ चीज़े हम पूरानी छोड़ आये है ।
आते आते उनकी आँखों में पानी छोड़ आये हैं ।
यह ऐसा दर्द हैं जो बया हो ही नहीं सकता ।
दिल तो साथ ले आये पर धड़कन छोड़ आये है ।


रात गुजारी फिर महकती सुबह आई … दिल धड़का फिर तुम्हारी याद आई.. आँखों ने महसूस किया उस हवा को … जो तुम्हें छु कर हमारे पास आई .. “सुप्रभात “

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